Monday, November 19, 2018

घर में घुसकर बुजुर्ग महिला का गला रेता, सोफे पर मिली लाश

देश की राजधानी दिल्ली में अपराधों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. वसंतकुंज में फैशन डिजाइनर की हत्या के बाद अब सरिता विहार इलाके में एक 73 साल की बुजुर्ग महिला सावित्री पांडे की गला रेतकर हत्या करने का मामला सामने आया है.

बुजुर्ग महिला की उन्हीं के घर में घुसकर हत्या कर दी गई. महिला की लाश मिलने से सनसनी फैल गई. घटना के समय महिला के पति किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे, जब वह घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उनकी पत्नी की लाश घर में सोफे पर पड़ी हुई है.

जानकारी के मुताबिक महिला के पति ने घर पहुंचकर देखा कि किसी ने उनकी पत्नी का गला रेतकर हत्या कर दी है और लाश सोफे पर पड़ी हुई है. बुजुर्ग महिला के पति ने पुलिस को तुरंत पुलिस को फोन कर इसकी जानकारी दी.

मौका-ए-वारदात पर पुलिस ने पहुंचने के बाद तफ्तीश की तो उन्हें पता चला कि हत्या लूट या चोरी के मकसद से नहीं की गई है. पुलिस का कहना है कि घर से कोई भी सामान गायब नहीं है. पुलिस का दावा है कि जब बुजुर्ग महिला अकेली थी तो घर में किसी जानकार ने ही प्रवेश किया था.

हालांकि, दुर्घटना वाले घर में सीसीटीवी कैमरे भी लगे थे, लेकिन ये कैमरे खराब निकले. एक कैमरा ड्रॉइंगरूम में और दूसरा घर के बाहर लगा था, लेकिन दोनों में से कोई भी काम नहीं कर रहा था.

पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और मामले की जांच कर रही है. पुलिस की मानें तो बुजुर्ग महिला का बेटा अपनी पत्नी के साथ घर के बगल में ही रहता है. पुलिस के मुताबिक बुजुर्ग महिला के पति स्टॉक एक्सचेंज में डायरेक्टर रह चुके हैं.

साहित्य के अशोक'

साहित्य आजतक में लेखक अशोक वाजपेयी ने 'साहित्य के अशोक' सत्र में हिस्सा लिया और लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति और साहित्य पर चर्चा की. इस दौरान उन्होंने अपने जीवन से जुड़े कई किस्से भी बताए. चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को सबसे ज्यादा खतरा अभी है.

अशोक वाजपेयी ने अपनी पहले किताब संग्रह को लेकर बताया, 'पहला कविता संग्रह 'शहर अब भी संभावना है' आने से पहले मैं करीब 200 कविताएं लिख चुका था, लेकिन मैंने अपने पहले संग्रह में करीब 150 कविताओं खारिज कर दी थी और उसमें सिर्फ 50-55 किताबें शामिल की गई थी. इस पुस्तक से एक पुस्तक के रुप में मेरा साहित्य में प्रवेश हुआ.'

दस्तक दरबार मंच पर साहित्य और हम

मशहूर लेखक और शायर जावेद अख्तर साहित्य आजतक के मंच पर दर्शकों से रूबरू हुए. उन्होंने यहां अपनी मशहूर पंक्तियों, शायरी को लोगों को सुनाया और सभी का मन मोह लिया. जावेद अख्तर ने सुनाया...''मुझे ऐसा लगता है कि किसी ने साजिश रची है.''

जावेद अख्तर ने कहा कि देश में ऐसा कोई नहीं हो सकता जिसे अपने मुल्क से प्यार ना हो, ये सब प्राकृतिक है. हर व्यक्ति को अपने शहर से प्यार होता है, हर किसी को देश से प्यार होता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि मैं किसी से नफरत करता हूं. हमारे सभ्यता में रहा है कि असहमत होना पाप नहीं है.

जावेद अख्तर बोले कि हर किसी को देश का छोटा सा हिस्सा दिया गया है, उस व्यक्ति के पास अपनी गली है मोहल्ला है लेकिन क्या वह अपनी उस जगह से प्यार करता है. बात देश से प्यार करने की हो रही है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अलग विचार होना जरूरी है, अगर एक विचार हो तो दिक्कत है. जो लोग देश को हिट करना चाहते हैं वो कम्युनल नहीं होंगे.

Thursday, November 1, 2018

प्रेस रिव्यू: पाकिस्तान से चीन तक बस सेवा पर भारत की आपत्ति

चीन और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित बस सेवा परियोजना को लेकर भारत की दोनों देशों के साथ राजनयिक स्तर पर ठन गई है.

यह बस सेवा लाहौर से पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर होते हुए चीन के शिनजियांग के बीच शुरू की जाएगी.

जनसत्ता अखबार में छपी ख़बर के मुताबिक, भारत ने इस बस सेवा का पाकिस्तान और चीन दोनों के सामने विरोध दर्ज किया है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान चीन के दौरे पर पहुंचे हैं.

विदेश सचिव विजय गोखले ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रीय सीमाओं से बाहर की संपर्क पहल को इस तरह लागू किया जाना चाहिए कि देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान हो.

अमरीका ने भारत से आयात की जाने वाली कम से कम 50 चीज़ों पर दी गई सीमा शुल्क की रियायत को वापस ले लिया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, जिन भारतीय उत्पादों पर अब अमरीका में आयात पर ड्यूटी वसूली जाएगी, उनमें ज्यादातर हैंडलूम और कृषि क्षेत्रों के हैं.

अमरीका का ये फैसला भारत के साथ व्यापार संबंधी मसलों पर ट्रंप प्रशासन के कड़े रुख को दिखाता है.

फेडरल रजिस्टर ने एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि अब तक जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (GSP) के शुल्क मुक्त प्रावधानों के तहत आने वाले 90 उत्पादों को सूची से बाहर किया जा रहा है. यह फैसला 1 नवंबर से लागू हो गया.

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों में खाली पड़े न्यायिक पदों को लेकर नाराज़गी जताई है.

द हिंदू अखबार के मुताबिक कोर्ट ने राज्यों और हाई कोर्ट को कहा है कि अगर उन्होंने पांच हज़ार न्यायिक पदों को जल्द नहीं भरा, तो ये काम वो खुद करेंगे. कोर्ट ने कहा कि हमारे पास केंद्रीकृत चयन प्रणाली है.

अदालत ने देश के सभी हाई कोर्ट और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से न्यायिक अधिकारियों के रिक्त पदों का ब्योरा और उन्हें भरने की समय सीमा की जानकारी देने को कहा है.

गूगल के कर्मचारियों ने कंपनी के दुनिया भर के दफ्तरों के बाहर महिला कर्मचारियों के साथ हुए व्यवहार के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं.

ये खबर द स्टेट्समैन अख़बार के पहले पन्ने पर है.

गूगर में महिलाओं को नौकरी पर रखने के तरीके, वेतन और उनके प्रति व्यवहार को लेकर गुस्सा बीते कई महीनों से बढ़ रहा था.

कंपनी ने बीते दो साल में यौन उत्पीड़न के आरोपों में पचास से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है.

हाल के महीनों में फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसी कंपनियों के कर्मचारियों ने भी प्रदर्शन किए हैं.