मलेशिया ने इस्लामिक उपदेशक ज़ाकिर नाइक के भाषण देने पर प्रतिबंध लगा दिया है.
ज़ाकिर नाइक ने मलेशिया के हिंदू और वहां रहने वाले चीनी लोगों पर विवादित बयान दिया था.
ज़ाकिर नाइक पर ये प्रतिबंध 20 अगस्त को लगाया गया. इससे पहले पुलिस ने उनसे दस घंटों तक पूछताछ की.
यह दूसरी बार है जब ज़ाकिर नाइक से उनके दिए गए भाषण पर सवाल उठे हैं. 8 अगस्त को दिए उनके भाषण में उन्होंने मलेशिया के हिंदूओं की ईमानदारी पर सवाल उठाया था और मलेशिया में रहने वाले चीनी लोगों को देश का 'मेहमान' कहा था.
मलेशियाई अधिकारियों का कहना है कि ये प्रतिबंध राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में लगाया गया है.
पुलिस के प्रवक्ता असमावती अहमद ने कहा, "इस तरह के आदेश सभी पुलिस दलों को दिए गए हैं. ये राष्ट्रीय सुरक्षा के हित को ध्यान में रखते हुए और भाईचारे की भावना का कायम रखने के लिए किया गया है."
ज़ाकिर ने अपने भाषण के लिए माफ़ी मांगते हुए कहा है कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है. अभी इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि उन पर लगी रोक मलेशिया की उनकी स्थाई नागरिकता को प्रभावित करेगी या नहीं.
8 अगस्त को ज़ाकिर ने मलेशियाई राज्य केलेंटन में एक भाषण दिया जिससे देश में नस्लीय तनाव फैल गया.
ज़ाकिर नाइक ने दावा किया कि मलेशिया के ज़्यादातर हिंदू मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद से ज़्यादा भारतीय प्रधानमंत्री के प्रति ईमानदार हैं. मलेशिया की लगभग 6 प्रतिशत आबादी हिंदू है.
ज़ाकिर नाइक ने मलेशिया में रहने वाले चीनी लोगों को भी देश में मेहमान कहा. मलेशिया की 20 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी चीनी मूल की है.
ख़ुद पर लगे बैन को देखकर ज़ाकिर नाइक ने माफी मांगते हुए अपना एक बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है.
"आपने पिछले कुछ दिनों से देखा होगा कि मुझ पर देश में नस्लीय कलह पैदा करने के आरोप लगाए जा रहे हैं और मेरे विरोधी मेरे बयान से कुछ वाक्यों को चुन कर उनमें नमक-मिर्च लगाकर पेश कर रहे हैं. आज मैंने पुलिस के सामने अपना रूख साफ़ कर दिया है"
"मुझे दुख है कि इस पूरी घटना से ग़ैर मुसलमान लोग मुझे नस्लवादी समझने लगे हैं. नस्लवाद एक बुराई है जिसका मैं कट्टरता से विरोध करता हूं. क़ुरान में भी ऐसा लिखा है और एक धार्मिक उपदेशक होने के नाते मैं जिन चीज़ों के समर्थन में खड़ा होता हूं ये उसके एकदम विरुद्ध है"
मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने इस बैन का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश कर के ज़ाकिर नाइक ने अपनी सीमा पार कर दी है. इसस पहले ये ज़ाकिर नाइक की स्थाई नागरिकता का बचाव करते देखे गए हैं.
"पहले तो मुझे ये नहीं पता कि इन्हें किस ने स्थाई नागरिकता दी, फिर स्थाई नागरिक होने के नाते भी आप राजनीति में हिस्सा नहीं ले सकते"
मलयाकिनी वेबसाइट ने महातिर के बयान को छापते हुए लिखा, "वो चीन के लोगों को वापस चीन जाने के लिए कह रहे हैं और भारत के लोगों को वापस भारत जाने के लिए. मैंने कभी इस तरह की कोई बात नहीं की. लेकिन उन्होंने ऐसा कह दिया. ये राजनीति है"
द स्टार वेबसाइट के अनुसार, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक अब्दुल रहीम नूर ने कहा, "जो उन्होंने केलांतन में कहा और जो वो भारत में करके आए है. इसके आधार पर मैं सरकार से गुज़ारिश करता हूं कि वो ज़ाकिर नाइक की स्थाई नागरिकता को समाप्त कर दें और उसे भारत को सौंप दें."
इसके अलावा मलेशिया का इस्लामिक समुदाय अभी भी ज़ाकिर नाइक के समर्थन में है.
मलेशिया की पन-मलेशियाई इस्लामिक पार्टी के अध्यक्ष अब्दुल हादी ने कहा, "ज़ाकिर नाइक को दी गई स्थायी नागरिकता तमाम देशों और दुनिया भर में स्वीकार किया गया मानवाधिकार है. इस्लाम भी उन लोगों की सुरक्षा के अधिकार की बात करता है जिनकी सुरक्षा ख़तरे में होती है. गैर मुसलमान लोगों की सुरक्षा की भी."
बेरिता हरीन की रिपोर्ट के अनुसार पेनांग मुफ्ती (इस्लामी न्यायविद) वान सलीम मोहम्मद नूर कहते हैं, "उनकी तुलनात्मक धार्मिकता और इस्लाम की वकालत करने की क्षमता के कारण ज़ाकिर को वो लोग सता रहे हैं जो इसका सामना नहीं कर सकते"
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